चरमपंथ की राह पर क्यों बढ़े 'काबिल' स्कॉलर मन्नान वानी
जिसके मारे जाने पर कश्मीर में चरमपंथ की नई लहर शुरू हुई उस मैट्रिक पास बुरहान वानी के विपरीत, 26 वर्षीय शोधकर्ता और गहन अध्ययन करने वा ले मन्नान वानी के इर्द-गिर्द एक जोशी ले विचारक की आभा थी. भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को विभाजित करने वाली नियंत्रण रेखा के क़रीब कश्मीर में सबसे अधिक फ़ौज की तैनाती वाले कुपवाड़ा ज़ि ले से ताल्लुक रखने वाले मन्नान अलीग ढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे थे. 5 जनवरी 2017 को अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर पकड़े उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर दिखाई दी और साथ में ये एलान भी कि वो चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मु जाहिदीन में शामिल हो गए हैं. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ( एएमयू) की आधिकारिक वेबसाइट पर लिखा है कि 26 वर्षीय मन्नान 'स्ट्रक्चरल ऐंड जियो-मोर्फोलॉजिकल स्टडी, कश्मीर' पर पीएचडी कर कर रहे थे. एएमयू की वेबसाइट के मुताबिक 2016 में मन्नान को 'जल, पर्यावरण, पारिस्थितिकी और समाज' पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए पेपर के लिए पुरस्कार भी मिला था. भोपाल के एआईएसईसीटी यूनिवर्सिटी में 'जल, पर्यावरण, ऊर्जा और समा...